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    Home»सिरमौर»…संगड़ाह के नाईचना व देवमानल गांव की बेटियों बनेगी डॉक्टर…
    सिरमौर

    …संगड़ाह के नाईचना व देवमानल गांव की बेटियों बनेगी डॉक्टर…

    By Ajay DhimanJune 19, 2025
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    नाहन। जिला सिरमौर के उपमंडल संगडाह की शामरा पंचायत के गांव नाईचना की रहने वाली वंशिका ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर अपना डाक्टर बनने के सपनों को साकार किया। वंशिका उर्फ वंशू ने नीट परीक्षा में 511 नंबर लेकर 98.5% के साथ अपने माता-पिता व क्षेत्र का नाम रौशन किया। प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए गांव नाईचना (टिक्कर) से बोगधार स्कूल की किलोमीटर की खड़ी चढ़ने वाली इस छात्रा ने +2 में विज्ञान संकाय में प्रदेश भर में 9वां स्थान प्राप्त किया था। वंशिका के पिता रमेश कुमार ठाकुर भारतीय सेना में लाॅस नायक पद से सेवानिवृत हैं और माता गृहणी है। देश सेवा के संस्कारों वाले इस परिवार की वंशिका ने अनुशासन और समर्पण को जीवन का हिस्सा बनाया और अपना लक्ष्य पूरा किया। वंशिका के साथ-साथ उपमंडल संगड़ाह के गांव देवामानल गांव की किसान की बेटी अंकिता ने नीट परीक्षा निकालने का अपने जीवन का लक्ष्य पूरा किया है। किसान परिवार में पली बढ़ी खेत खलिहान में काम करने वाली यह बेटी क्षेत्र के अन्य किसान परिवारों के बच्चों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई है। अंकिता के पिता पूर्व पंचायत उपप्रधान वीरधन के अनुसार उन्होंने काफी संघर्ष झेले, मगर तीन बेटियों व एक बेटे की पढ़ाई पर कभी आंच नहीं आने दी। क्षेत्र की इन दोनों बेटियों की कामयाबी से उनके परिजनों व परिचितों में खुशी की लहर है और सोशल मीडिया पर लगातार लोग इन्हें बधाई दे रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा इस बात की भी है कि, जिला के दूरदराज संगड़ाह उपमंडल से हालांकि पिछले कुछ सालों से लगातार सहायक प्रोफेसर, डॉक्टर व अन्य बड़े सरकारी पदों पर युवा चयनित हो रहे हैं, मगर इसके बावजूद क्षेत्र के महाविद्यालय व अस्पताल अथवा स्वास्थ्य तथा शिक्षण संस्थानों में स्टाफ का हमेशा भारी अभाव रहता है। इसका 1 मुख्य कारण जहां काफी कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा अपने दूरदराज इलाके में सेवाएं देने की बजाय शहरी क्षेत्रों को पसंद किया जाना बताया जा रहा है, वहीं इलाके के नेताओं द्वारा खाली पदों की और ध्यान न देना तथा कुछ को विरोधी दलों के परिवार के होने के चलते प्रताड़ित करने के लिए 200 से 400 किलोमीटर दूर तबादला करना भी बताया जाता है। लोग कहते तो यहां तक है कि, इलाके के कईं क्लास 3 अथवा छोटे कर्मचारी शहरों के आसपास ट्रांसफर के लिए नेताओं व चमचों को मोटी रकम देने के लिए भी तत्पर रहते हैं। इसके बावजूद जैसे जैसे इलाके के युवा बड़े पदों पर पंहुच रहे हैं, अब तक एनएस और यहां तक कि, राज्य उच्च मार्ग से भी वंचित पहले मुख्यमंत्री डॉ परमार का विधानसभा हल्का रहे इस क्षेत्र का पिछड़ापन भी दूर होता जा रहा है।

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