नाहन: मंडी ज़िले के टारना वृत्त में 22 दिसंबर 2025 को पल्स पोलियो अभियान की ड्यूटी के दौरान गिरने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की मौत ने प्रदेश भर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को झकझोर कर रख दिया है। आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन (संबद्ध सीटू) ने इस घटना को सरकार की असंवेदनशीलता, विभागीय लापरवाही और संस्थागत शोषण का घिनौना उदाहरण बताया है।..
यूनियन ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बेहद कम मानदेय पर पल्स पोलियो, बीएलओ ड्यूटी, फेस ट्रैकिंग, हाउस-टू-हाउस सर्वे जैसे जोखिमपूर्ण बहु-विभागीय कार्य कराए जाते हैं, लेकिन दुर्घटना या मृत्यु होने पर सरकार जिम्मेदारी लेने से बचती है। इससे पहले कुल्लू के सैंज क्षेत्र तथा जून 2024 में चंबा ज़िले में मीटिंग में जाते समय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरला और श्रेष्ठा की मौतें भी इसी लापरवाह व्यवस्था की देन हैं।
यूनियन ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को न तो सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं, न बीमा, न जोखिम भत्ता और न ही सामाजिक सुरक्षा। इसके साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चार-चार महीनों तक वेतन रोके रखना आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मानसिक व आर्थिक रूप से तोड़ने का प्रयास है। यूनियन का आरोप है कि यह स्थिति जानबूझकर बनाई जा रही है ताकि आंगनवाड़ी योजना को कमजोर कर अंततः खत्म किया जा सके।
आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन (सीटू) मांग करती है कि—
ड्यूटी के दौरान मृत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा के परिजनों को तत्काल 50 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए।
पूर्व में ड्यूटी के दौरान मृत सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मामलों में समान मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाए।
सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दुर्घटना बीमा, जोखिम भत्ता व सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
बहु-विभागीय ड्यूटी के दौरान सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
पिछले चार महीनों से लंबित केंद्र का वेतन तथा दिसंबर माह का राज्य का वेतन तुरंत जारी किया जाए और आगे से वेतन एकमुश्त व समय पर दिया जाए।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र इन मांगों पर निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेश-भर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की होगी।… सिरमौर में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा इसका विरोध किया।
